बंगाल चुनाव 2021:जय श्री राम और दुर्गा पर राजनीति


बंगाल में विधानसभा  चुनाव होनें वाले है। इस  राजनीतिक रणभूमि में सारी पार्टीयां शाम दाम दंड भेद कर के अपनी जीत दर्ज करानें की कोशिश में है। हर पार्टी अब जनता के दुख को सुननें  और उनकी  हर मांगे पूरी करने पहुँची है।जो ममता सरकार पिछले दस साल नहीं कर सकी,उसे अब आने वाले पांच साल में पूरा करनें का  वादा कर रहीं है। वहीं भाजपा सरकार परिवर्तन लानें का सुनहरा सपना दिखा रही है,जैसे उत्तर प्रदेश में विकास का दिखाया था। ख़ैर ये हर राजनैतिक पार्टियों की प्रवृति होती है। शासन काल खत्म होते ही तत्कालीन सरकार अपनें कामो का लेखा- जोखा आमजन को दिखाती है ,यदि जमीनी तौर पर काम किया होता है तो धौंस से वोट मांगे जाते है,नहीं तो फिर से एक और मौका देने की वही गलती दोहराने की दरख्वास्त की जाती है । अन्य पार्टिया इस मौके का बहुत दिनों से इंतजार करतीं है। विकल्प के रूप में यदि आमजम चुने तो किसे ? कोई तो होना चाहिए, नहीं तो लोकसभा चुनाव जैसे हालात हो जाते है। फिलहाल चुनाव बंगाल,तमिल नाडु ,असम,केरल और पुड़ीचेरी में है। लेकिन बंगाल सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र  बना है। 295 सीटों की युद्ध है,जिसमें जीत हासिल करनें के लिए 145 सीट की जरुरत है। आठ  पाली में इस युद्ध को लड़ा जाएगा ,जिसकी शुरुआत 27 मार्च से होगी और अंत 29 अप्रैल है। नतीजे 2 मई को आयंगे ,फिलहाल इस युद्धभूमि का कुरुक्षेत्र नंदीग्राम बन गया है, जहां से दीदी नें अपना नामांकन दर्ज कर दिया है। वैसे तो दीदी को किसी अपने नें ही उन्हे धोखा दे दिया है। सुभेन्दु अधिकारी दीदी के सबसे करीबी माने जाते थे,और उन्होने चुनावी युद्ध मे साथ देने के बजाए पार्टी बदल कर खुद दीदी  से दो हाथ करने मैदान में उतर गए। राजनेताओं का कोई भरोसा नहीं , जब लगता है जहाज़ डूबने वाली है तो दूसरी जहाज़ पर सैर करनें लगते है।विचारधारा भी तुरंत बदल जाती है,अभी तक जिस पार्टी में सालों से थे,उसकी अब सारी खामियाँ नजर आती है। सोचने वाली बात है की आखिर नाराज़गी चुनाव देख के क्यों होती  है? भाजपा सरकार पूरी ताकत के साथ अपनें सारे दिग्गज नेताओं को बंगाल की भूमि पर प्रचार पसार के लिए भेज रही है। परिवर्तन की रैली हो रही जय श्री राम के नारे लग रहें हैं  । श्री राम लगता है , प्रचारक हो भाजपा के, जय श्री राम भी अब राजनैतिक मुद्दा बन गए हैं । काँग्रेस पार्टी के होनहार युवक नेता राहुल गांधी नें  लगता है पहले से हार स्वीकार कर ली है। उनकी रैली लगता है चुनाव समाप्त होने के बाद से शुरू होगी । बंगाल चुनाव में मुद्दे भी काफी रोमांचक है, कोई दुर्गा माँ का पाठ कर रहा, कोई जय श्री राम के नाम का जाप कर रहा । जैसे -जैसे चुनाव की तारीख़  पास आ रही है, राजनेताओं के मंदिर के चक्कर लगनें उतनी ही तेजी से शुरू हो रहें है। किसी को कुर्सी के जानें का डर है, किसी को कुर्सी पानें का जुनून , लेकिन काँग्रेस सरकार सबसे सुकून में है, न तो कुछ खोनें का डर  है ,और न कुछ पानें की उम्मीद। फिलहाल भाजपा नें "कोबरा'' यानी मिथुन चक्रवर्ती को शामिल किया है।



हालहीं में ममता दीदी पर हमला हुआ है,उनका कहना है की भाजपा सरकार नें यह हमला करवाया है। जिसपर भाजपा सरकार के प्रवक्ता कहते है दीदी जनता की सहानभूति पानें के लिए चुनावी स्टंट कर रहीं है।उनका कहना है की इतनी बड़ी सुरक्षा बल होनें के बावजूद हमला हो जा रहा ,तो सबसे पहले उन्हे अपनें सुरक्षा टीम को बदल देना चाहिए । फिलहाल दीदी के समर्थक आक्रोश में दिखाई दे रहे है।क्या पता गुस्से में वोट भी दीदी को मिल जाए लेकिन श्री राम को मानने वाले भी कम नहीं है।


हर चुनावी रणभूमि की अपनी अलग पहचान होती है, उसी आधार पर हर  पार्टी अपनी रणनीति बनाती है। चुनाव जीतना भी एक शैली है कैसे हर बार झूठ बोल कर  विश्वास जीता जा सकता है यह कोई राजनेताओं से सीखे । जनता भी जानती है उन्हे अच्छे और बुरे में चुनाव नहीं करना बल्कि बुरे और  बहुत बुरे में करना है। मतदाता भी बहुत तरह के होते है, एक जो जागरूक होते है जिन्हे पूरे प्रदेश का  विकास चाहिए ,एक होते है जिन्हे अपने समुदाय के विकास से मतलब  है। और एक होते है जिन्हे केवल अपनें विकास से मतलब  है, जेब में सौ रुपए और दारू की एक बोतल थमा देने भर  से उनका विकास और वोट देने का मकसद पूरा हो जाता है । खैर वो कम से कम  अपना नागरिक धर्म तो निभाते है, कुछ ऐसे भी पढे लिखे है जो सरकार की आलोचना तो करते है लेकिन मतदान नहीं करने जाते है। पर्याप्त आयु होनें के बावजूद मतदान कार्ड नहीं बना होता है।एक जागरूक नागरिक का धर्म है की वो मतदान करे ,लोकतांत्रिक शक्ति का प्रयोग कर सरकार चुनें और फिर शिकायत करे। वैसे बंगाल में कुछ इलाको में मुस्लिम मतदाता ज्यादा है,इसलिए पार्टियों का  रुझान भी उधर ही दिखाई देता था,लेकिन इस  बार कुछ अलग ही देखनें को मिल रहा ,मस्जिद के बजाए मंदिर को ज्यादा महत्व दिया जा रहा । 2 मई को देखना है दीदी की जीत होती है या दादा की ,उम्मीद है जिसकी भी सरकार बनें अपने वादो को पूरा करेंगी ।  

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