बंगाल में विधानसभा चुनाव होनें वाले है। इस राजनीतिक रणभूमि में सारी पार्टीयां शाम दाम दंड भेद कर के अपनी जीत दर्ज करानें की कोशिश में है। हर पार्टी अब जनता के दुख को सुननें और उनकी हर मांगे पूरी करने पहुँची है। जो ममता सरकार पिछले दस साल नहीं कर सकी,उसे अब आने वाले पांच साल में पूरा करनें का वादा कर रहीं है। वहीं भाजपा सरकार परिवर्तन लानें का सुनहरा सपना दिखा रही है,जैसे उत्तर प्रदेश में विकास का दिखाया था। ख़ैर ये हर राजनैतिक पार्टियों की प्रवृति होती है। शासन काल खत्म होते ही तत्कालीन सरकार अपनें कामो का लेखा- जोखा आमजन को दिखाती है ,यदि जमीनी तौर पर काम किया होता है तो धौंस से वोट मांगे जाते है,नहीं तो फिर से एक और मौका देने की वही गलती दोहराने की दरख्वास्त की जाती है । अन्य पार्टिया इस मौके का बहुत दिनों से इंतजार करतीं है। विकल्प के रूप में यदि आमजम चुने तो किसे ? कोई तो होना चाहिए, नहीं तो लोकसभा चुनाव जैसे हालात हो जाते है। फिलहाल चुनाव बंगाल,तमिल नाडु ,असम,केरल और पुड़ीचेरी में है। लेकिन बंगाल सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना है। 295 सीटों की यु...