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बंगाल चुनाव 2021:जय श्री राम और दुर्गा पर राजनीति

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बंगाल में विधानसभा  चुनाव होनें वाले है। इस  राजनीतिक रणभूमि में सारी पार्टीयां शाम दाम दंड भेद कर के अपनी जीत दर्ज करानें की कोशिश में है। हर पार्टी अब जनता के दुख को सुननें  और उनकी  हर मांगे पूरी करने पहुँची है। जो ममता सरकार पिछले दस साल नहीं कर सकी,उसे अब आने वाले पांच साल में पूरा करनें का  वादा कर रहीं है। वहीं भाजपा सरकार परिवर्तन लानें का सुनहरा सपना दिखा रही है,जैसे उत्तर प्रदेश में विकास का दिखाया था। ख़ैर ये हर राजनैतिक पार्टियों की प्रवृति होती है। शासन काल खत्म होते ही तत्कालीन सरकार अपनें कामो का लेखा- जोखा आमजन को दिखाती है ,यदि जमीनी तौर पर काम किया होता है तो धौंस से वोट मांगे जाते है,नहीं तो फिर से एक और मौका देने की वही गलती दोहराने की दरख्वास्त की जाती है । अन्य पार्टिया इस मौके का बहुत दिनों से इंतजार करतीं है। विकल्प के रूप में यदि आमजम चुने तो किसे ? कोई तो होना चाहिए, नहीं तो लोकसभा चुनाव जैसे हालात हो जाते है। फिलहाल चुनाव बंगाल,तमिल नाडु ,असम,केरल और पुड़ीचेरी में है। लेकिन बंगाल सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र  बना है। 295 सीटों की यु...

किसान बिल 2020

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हमारा देश कृषि प्रधान देश है।देश के विकाn स में सबसे ज्यादा भागीदारी किसान की है। पहले आए दिन किसान-आत्महत्या की खबरें सुनाई देती थी । हालांकि किसान मरता आज भी है लेकिन उसकी ख़बर अब नहीं आती। किसान की आय बहुत कम होती है जितना लागत वो खेती करने में लगाता है उतना उसको नही मिलता जिसकी वजह से उसे कर्ज लेना पड़ता है। परिस्थिति अनुकूल होने के कारण. किसान कर्ज वापस करने के लिए अपना खेत बेच देता है। और वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाता है ।मरने के अलावा उसके पास विकल्प नही बचता। आत्महत्या करना साधारण बात हो गयी है लेकिन जब कारण सामान्य हो तब ये चिन्ता का विषय हो जाता है। सरकार ने किसान के बारे में 2014 में ही सोच लिया था ।2020 में किसानों के हित के लिए तीन नए कानून लागू किये। विपक्ष नें विरोध नहीं जताया लेकिन चर्चा से परहेज किया। 23 सितंबर को दोनों सदनों में इसे पारित कर दिया गया।जिसके विरोध में 27 सितंबर से पंजाब के किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। उस वक्त हमारी जागरूक मीडिया सुशांत को इंसाफ दिलाने के बाद दीपिका पादुकोण के ऊपर ड्रग्स लेने के आरोप की जानकारी सांझा कर के दर्शकों को जागरू...

बिहार चुनाव ।

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हम सब एक लोकतांत्रिक देश के निवासी है, जहाँ लोगो के लिए और लोगो के द्वारा ही फैसले लिए जाते है। इसलिए चुनाव का बहुत बड़ा महत्व है, जनता सरकार बनाती भी है और गिराती भी है। नियम अनुसार सरकार उसकी होनी बननी चाहिए जिसने काम किया हो, या जिसके वादे जनहित के लिए हो । बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले है, जो तीन चरण में होने वाला है। पहले चरण 28 अक्टूबर है,दूसरा 2 नवम्बर है और तीसरा 10 नवंबर है। जिसके लिए सभी सरकारों के दिग्गजो ने कमर कस ली है। शाम दाम दंड भेद सबका इस्तेमाल करके लोगो से वोट लेने की होड़ चल रही है। कोई मुफ्त में वैक्सीन बाट रहा तो कोई नौकरी दिलाने की बात कर रहा। बिहार की जनता के लिए ये कुछ नया नही है, मीडिया जो बाढ़ के दौरान बिहार में झांकने तक नही गयी थी वो अब हरपल बिहार में सांसे ले रही। किस नेता  ने क्या कहा पूरा ब्यौरा मुहैया करा रही, काश बाढ़ में किस नेता ने मदत की इसका भी ब्यौरा इसी तरह दिखाते। खैर अब बात ये की जनता भी इस बात से अवगत है कि अब नेता जी अब आये है वादे करने जो बाद में वो खुद ही भूलने वाले है। कोई जाति की राजनीति कर रहा तो कोई जुमले से लोगो को आकर...

कोरोना वुहान से नही तब्लीगी जमात से फैला - जागरूक मीडिया।

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 पूरे विश्व में कोरोना महामारी का कारण चीन का वूहान शहर बताया जाता है। भारत मे भी आया तो वही से था लेकिन मीडिया और सत्ता पक्ष के कुछ मंत्री और विधायक के हिसाब से देश मे कोरोना फैलाने का काम तब्लीगी जमात ने किया। दिन रात एक कर के मीडिया ने तब्लीगी जमात को कठघरे में खड़ा किया न किसी कोर्ट की आवश्यकता पड़ी न ही किसी सबूत की। उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर ने भी तब्लीगी जमात को फटकार लगाई और कहा कि भारत मे कोरोना फैलाव के मुख्य आरोपी तब्लीगी जमात के लोग है इन्हें दंड मिलना ही चाहिए। मीडिया ने पूरी निष्ठा के साथ इस मुद्दे को चलाये रखा जहाँ कोरोना वहां तब्लीगी जमात का नाम सुनाई देने लगा। अखबारों में लेख आने लगे लोग कब तबलीगी जमात से किसी विशेष समुदाय पर सन्देह करने लगे ये दर्शको को पता ही नही चला। सत्ता पक्ष के विधायक जी ने जमात से सीधे मुस्लिम समुदाय पर वार करने लगे और सब्जी को थूक कर बेचे जाने की जानकारी भी दी। इस तरह देश में एक सब्जी बेचने वाले का धर्म पूछा जाने लगा। जो कि ठीक भी है कोई थूका हुआ सब्जी आखिर क्यों खायेगा? और जब खबर सत्ता पक्ष से हो तो किस बात का सन्देह? और मिडिय...

प्रेस कॉन्फ्रेंस का दौर खत्म अब "मन की बात "ही है प्रधानमंत्री पर होने वाले सवालों का जवाब।

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पत्रकारों के सम्मेलन में जब प्रधानमंत्री से सवाल किये जाते थे तो उसका जवाब मिलता था। इससे देश पर कुछ खास फर्क नही पड़ता था लेकिन देश में लोकतंत्र की भावना मजबूत होती थी। प्रधानमंत्री सरकार के बातौर मुखिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देश की जनता को योजनाओं और उनपे लागत का ब्यौरा देते थे। इसके साथ देश के चुनिंदा पत्रकारों को प्रश्न पूछने की अनुमति होती थी। इससे पारदर्शिता भी होती थी और काफी तीखे सवालों का सामना भी करना पड़ता था।देश मे प्रेस कॉन्फ्रेंस का चलन आज भी है लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री को प्रेस कॉन्फ्रेंस कुछ  खास पसंद नही आया। अभी तक उन्होंने मात्र एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है जिसमे उनसे 19 सवाल दागे गए लेकिन उन्होंने अमित जी को सर्वोपरि बात कर प्रश्न को टाल दिया। फिलहाल ये जरूरी नही की प्रधानमंत्री ही सवालो के जवाव दे लेकिन जब सवाल किसी व्यक्ति विशेष से पूछा जाता है तो जवाब देना महत्वपूर्ण हो जाता है। 6 सालो में एक बार प्रेस कॉन्फ्रेंस, 20 सवालो पर मौन रहे । ये कॉन्फ्रेंस 2019 चुनाव नतीजे के बाद हुई मीडिया को धन्यवाद करने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने मुँह में दही ज...

बेचारी हिंदी जी अंग्रेजी बाबू के आगे शर्मा जाती है।

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हमारे देश में अनेक भाषाएँँ बोली जाती है लेकिन सबसे ज्यादा अंग्रेजी बाबू  प्रभावशाली है और हो भी क्यों ना उनकी मान जान जो इतनी है। कहने को तो हिंदी बेचारी हमारी मातृभाषा है लेकिन शाायद ही हम उसे उतनी इज़्ज़त दे पाए है। सरकारी दफ्तर में हिंदी जी अभी तक बहुत आगे नही बढ़ पाई है। उनका इस्तेमाल केवल अंग्रेजी बाबू को ट्रांसलेट कर के किया जाता है। जब आप हिंदी जी को ट्रांसलेट कर के पढ़ेंगे तो वो देखने में लुभावनी लगेंगी लेकिन समझने में कठिन महसूस होंगी। हिंदी जी को व्यवहार में लाने से हम उनका मान जान बढ़ा सकते है न कि केवल अंग्रेजी बाबू को हिंदी में बदल देने से। हिंदी जी की एक अपनी पहचान है हालाकि समाज मे उनकी पहचान पर सवाल उठते रहते है। किसी भी इंसान की बोलचाल ही उसे प्रभावशाली बनाती है अक्सर जब भी हम चार लोगों में किसी व्यक्ति के मुंह से टूटी- फूटी , बेढंग अंग्रेजी बाबू को सुन लेते है तो हमारे अंदर उनके लिए सम्मान की भावना उत्पन्न होती है। वही बेचारी हिंदी जी शर्म से मुंह से निकल ही नही पाती। बचपन से ही अंग्रेजी बाबू को सीखाने के लिए अभिभावक बच्चो को अंग्रेजी मीडियम स्कूल में दाखिल...