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Showing posts from August, 2020

आजादी

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  सुकून तो बहुत है इस देश मे लेकिन डर है अकेले जाने का। ये कैसी आजादी है? अकेले जाने से डर लगता है? आजाद हो ? किसके गुलाम हो? डर के? कौन सा डर ? तुम भी जानते हो मैं भी। कुछ हो न जाए। तो फिर साथ का इंतजार करे? लेकिन साथ कोई कब तक देगा? तो क्या ना जाए डर से? ये कब तक होगा? निकलना तो पड़ेगा ही सामना तो होगा ही आज नही तो कल । जब हर पल आपके इर्द गिर्द खतरा हो तो आप जीना नही छोड़ सकते। वैसे कुछ हुआ नही अभी तक लेकिन बुरी नजरो ने बहुत किया वार । ये हकीकत है हमारे समाज का। अगर मुश्किल है रास्ते तो उसको बनवाया जाए या रास्ता बदल दिया जाए? क्या रास्ते बदलने से सब ठीक हो जाएगा? क्या घर मे बैठे रहने से सब ठीक हो जाएगा? कुछ होना चाहिए इसपर लेकिन कैसे होगा? क्या बंदिश और बढ़ा दी जाए? सारे सपनो को दफन कर दिया जाए?  चुप रहा जाए? सह लिया जाए? किसी के विचारों को तो नाही रोका जा सकता लेकिन क्या किसी को आजादी छिनने की आजादी मिलनी चाहिए?  तो क्या करे खुद के लिए आवाज उठाये?  कौन सुनेगा ? सुनेगा तो क्या करेगा? सलाह देगा? घर में रहने की? हद है...

बरसों के संघर्ष का प्रतिफल श्री रामजन्मभूमि शिलान्यास।

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"जन्मभूमि मम पूरी सुहावन उत्तर दिस सरजू बह पावन" रामचारित मानस के इस चौपाई में भगवान ने अपने जन्मस्थान के बारे में यह कहा है की अयोध्यापुरी मेरा सबसे प्रिय स्थान है जहाँ मेरा जन्म हुआ है इसके उत्तर दिशा में सरजू बहतीं है जिसमें स्नान मात्र करने से मनुष्य श्री राम के सहज ही निकट हो जाता है।अयोध्या जो श्री राम के नाम से जानी जाती है जिसके कड़ कड़ में ईष्वर वास करते है जिसकी हर गलियों में भक्ति विद्यमान है। इसके साथ ही अयोध्या उस ऐतिहासिक, समाजिक, और धार्मिक विवाद के लिए भी जाना जाता था जो करीबन 30 साल तक धार्मिक उथलपुथल का कारण बनते दिखाई दिया। 6 दिसम्बर 1992 ये दिन सायद ही कोई भूल सकता है। इस दिन आक्रमणकारी बाबर के संरक्षण में बनी बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया गया था। और इसके बाद ये विवाद राजनीतिक मुद्दे में परिवर्तित हो गया। भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया लेकिन फिर भी कोई नतीजा सामने नही आ पाया।हिंदू की आस्था से जुड़े इस विवाद को सुलझने में बहुत साल लग गये । कुछ समय तक तो ऐसा लगने लगा की ये मामला कभी किसी निर्णय तक नही पहुँच पायेगा। 2014 मे...

एक पत्रकार की निष्पक्ष पत्रकारिता ही राष्ट्रवाद है।

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पत्रकार कौन है? पत्रकारिता क्या है? आधुनिक युग में पत्रकारिता भी पैसा कमाने के जरिये के रूप में देखा जाने लगा है। पहले भी स्थिति कुछ उत्तम नही थी लेकिन अब बद से बदतर जरुर होती जा रही। पत्रकार वो है जो कोई खबर को बिना तोड़ मरोड़ कर ,निस्पक्ष और सटीक जानकारी आम जन तक पहुँचाये। उसकी कलम से लिखी खबर जनहित में हो। लेकिन अब पत्रकारों की स्थिति ठीक नही,सत्ता बदलने के साथ साथ पत्रकार की कलम से निस्पक्ष होने की कला अब मरती दिख रही। ये लोकतंत्र के लिए घातक है। जागरूक आमजन को अखबार पढ़ते समय  चाटुकारिता स्पष्ठ रूप से समझ आती है। न्यूज़ चैनल ने तो मानो पत्रकारिता की हत्या कर दी हो। 24 घण्टे न्यूज़ आपको सुनाई देगी कुछ तो खुद से बनाई भी जाती है। रोज न्यूज़ रूम में बैठे पत्रकार प्राइम टाइम शो में कोई विशेष उद्देश्य से बैठे होते है। कुछ काफी शोर मचाते है कुछ काफी नरम रहते है। उन्हें देखने वाली जनता के दिमाग को रोज  भ्रमित किया जाता है । सत्ता में जो सरकार रहती है पत्रकार उसी की चाटूकारिता करने पर विवश होता है। ऐसा ना करने पर पत्रकार को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है अब तो सरकार पर सव...