हम सब एक लोकतांत्रिक देश के निवासी है, जहाँ लोगो के लिए और लोगो के द्वारा ही फैसले लिए जाते है। इसलिए चुनाव का बहुत बड़ा महत्व है, जनता सरकार बनाती भी है और गिराती भी है। नियम अनुसार सरकार उसकी होनी बननी चाहिए जिसने काम किया हो, या जिसके वादे जनहित के लिए हो । बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले है, जो तीन चरण में होने वाला है। पहले चरण 28 अक्टूबर है,दूसरा 2 नवम्बर है और तीसरा 10 नवंबर है। जिसके लिए सभी सरकारों के दिग्गजो ने कमर कस ली है। शाम दाम दंड भेद सबका इस्तेमाल करके लोगो से वोट लेने की होड़ चल रही है। कोई मुफ्त में वैक्सीन बाट रहा तो कोई नौकरी दिलाने की बात कर रहा। बिहार की जनता के लिए ये कुछ नया नही है, मीडिया जो बाढ़ के दौरान बिहार में झांकने तक नही गयी थी वो अब हरपल बिहार में सांसे ले रही। किस नेता ने क्या कहा पूरा ब्यौरा मुहैया करा रही, काश बाढ़ में किस नेता ने मदत की इसका भी ब्यौरा इसी तरह दिखाते। खैर अब बात ये की जनता भी इस बात से अवगत है कि अब नेता जी अब आये है वादे करने जो बाद में वो खुद ही भूलने वाले है। कोई जाति की राजनीति कर रहा तो कोई जुमले से लोगो को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा। इतने सालों से बीहर में क्या परिवर्तन आए है? सरकार लालू की भी थी और फिर नितीश जी तो फिलहाल है ही। बिहारी भाषा में बोले तो - "का उखाड़ लिए"? चुनाव अच्छे और बुरे में है ही नही , बुरे और बहुत बुरे में है। किसी को अपने कामो का ब्यौरा देने में कोई दिलचस्पी नही है जितना विपक्ष के लोगो की नाकामी गिनाने में हो रही है,वही हाल विपक्ष का भी है।
इस तरह जनता को गुमराह किया जा रहा। देखना ये है कि जीत किसकी होगी लेकिन ये तो तय है कि जो भी जीतेगा वो फिर 5 साल बाद ही जनता के बीच दिखाई देगा।
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