कोरोना वुहान से नही तब्लीगी जमात से फैला - जागरूक मीडिया।



 पूरे विश्व में कोरोना महामारी का कारण चीन का वूहान शहर बताया जाता है। भारत मे भी आया तो वही से था लेकिन मीडिया और सत्ता पक्ष के कुछ मंत्री और विधायक के हिसाब से देश मे कोरोना फैलाने का काम तब्लीगी जमात ने किया। दिन रात एक कर के मीडिया ने तब्लीगी जमात को कठघरे में खड़ा किया न किसी कोर्ट की आवश्यकता पड़ी न ही किसी सबूत की। उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर ने भी तब्लीगी जमात को फटकार लगाई और कहा कि भारत मे कोरोना फैलाव के मुख्य आरोपी तब्लीगी जमात के लोग है इन्हें दंड मिलना ही चाहिए। मीडिया ने पूरी निष्ठा के साथ इस मुद्दे को चलाये रखा जहाँ कोरोना वहां तब्लीगी जमात का नाम सुनाई देने लगा। अखबारों में लेख आने लगे लोग कब तबलीगी जमात से किसी विशेष समुदाय पर सन्देह करने लगे ये दर्शको को पता ही नही चला। सत्ता पक्ष के विधायक जी ने जमात से सीधे मुस्लिम समुदाय पर वार करने लगे और सब्जी को थूक कर बेचे जाने की जानकारी भी दी। इस तरह देश में एक सब्जी बेचने वाले का धर्म पूछा जाने लगा। जो कि ठीक भी है कोई थूका हुआ सब्जी आखिर क्यों खायेगा? और जब खबर सत्ता पक्ष से हो तो किस बात का सन्देह? और मिडिया भी तो यही कह रही अब तो इस बात की पुष्टि हो ही गयी क्योंकि मीडिया कभी गलत नही दिखाती । दिल्ली में भर्ती तब्लीगी जमात के लोगो ने प्लाज़्मा डोनेट किया तो उसे नाटक बताया गया और सही बात है विष देने वाले जब अमृत देने लगे तो कुछ तो गलत है।

बॉम्बे हाइकोर्ट ने लगाई फटकार।
दिन बीते लॉकडाउन की प्रक्रिया भी बढ़ने लगी। फिर 22 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय मीडिया को फटकार लगाते हुए कहा की करोना काल के दौरान मीडिया द्वारा तब्लिगी जमात को लेकर ग़लत तरीक़ों से  खबरें चलायी गयी और प्रॉपगैंडा की तरह पेश किया गया जो निंदनीय है ।
उस दौरान कई सब्ज़ी वाले परेशान हुए , मुसलमान होने की सजा मिली जो 10 5 रुपए कमाने वाले थे । 
क्या शर्म नहीं आती है?? 
लेकिन ये मीडिया की सफलता है कि वो समाज को ज़हरीला बना सकता है , सांप्रदायिक बना सकता है ।
हाई कोर्ट में ये आवाज़ आयी है बहुत अच्छी बात है, लेकिन क्या वो मीडिया इसपे चर्चा करेगा?? नहीं करेगा , जनता को मालूम भी नहीं है 
क्या ये न्यूज़ रूम में बैठे बड़े पत्रकार ये खबर चालयेंगे की हमने आपको गलती से तब्लिगी जमात को लेकर प्रॉपगैंडा फैलाया , आपके बच्चों के दिमाग़ में ज़हर भरा और अपने ही देश के नागरिकों के बारे में इस तरीक़े से सोचने लगे जो सब्ज़ी से 10 रुपए में दिन का गुज़ारा करता है ।। 
क्या कोई कर रहा है ?? कोई नहीं कर रहा है , वो भी नहीं कर रहा है जो IT cell के चपेटे में आकर share कर रहे थे , की हाँ इस केस को देखना चाहिए ये ग़लत share हो गया ।। 

ये विष , जो मीडिया धीरे धीरे आपके रगो में घोल रही है, आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपने कब इंसानियत को छोड़ कर दंगायी का रूप ले लिया है ।।

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