बरसों के संघर्ष का प्रतिफल श्री रामजन्मभूमि शिलान्यास।
"जन्मभूमि मम पूरी सुहावन उत्तर दिस सरजू बह पावन" रामचारित मानस के इस चौपाई में भगवान ने अपने जन्मस्थान के बारे में यह कहा है की अयोध्यापुरी मेरा सबसे प्रिय स्थान है जहाँ मेरा जन्म हुआ है इसके उत्तर दिशा में सरजू बहतीं है जिसमें स्नान मात्र करने से मनुष्य श्री राम के सहज ही निकट हो जाता है।अयोध्या जो श्री राम के नाम से जानी जाती है जिसके कड़ कड़ में ईष्वर वास करते है जिसकी हर गलियों में भक्ति विद्यमान है। इसके साथ ही अयोध्या उस ऐतिहासिक, समाजिक, और धार्मिक विवाद के लिए भी जाना जाता था जो करीबन 30 साल तक धार्मिक उथलपुथल का कारण बनते दिखाई दिया। 6 दिसम्बर 1992 ये दिन सायद ही कोई भूल सकता है। इस दिन आक्रमणकारी बाबर के संरक्षण में बनी बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया गया था। और इसके बाद ये विवाद राजनीतिक मुद्दे में परिवर्तित हो गया। भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया लेकिन फिर भी कोई नतीजा सामने नही आ पाया।हिंदू की आस्था से जुड़े इस विवाद को सुलझने में बहुत साल लग गये । कुछ समय तक तो ऐसा लगने लगा की ये मामला कभी किसी निर्णय तक नही पहुँच पायेगा। 2014 में जब भाजपा की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मंदिर वही बनेगा इस वादे के साथ बहुमत में आयी तब विपक्ष ने बहुत तंज कसा और इसे राजनीतिक मुद्दा बताया। लेकिन फिर 8 नवम्बर 2019 एक ऐतिहासिक निर्णय मुख्य न्यायधीश रंजन गगोई के अंतर्गत सुनाया गया जो रामलला के पक्ष में था। और धर्मिक सामंजस्य को ध्यान में रख कर मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का फैसला भी लिया गया।इसके बाद से विपक्षीदल तारीख पूछने लगे और आखिर वो पल भी आ गया जब विपक्ष के मुँह पर केंद्रीय सरकार द्वारा करारा जवाब दिया गया। 5 अगस्त 2020 ये स्वर्णिम दिन इतिहास के पन्नो में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। अयोध्या में उत्साह की लहर दौड़ने लगी। पुरषोत्तम श्री राम आखिर अयोध्या में अब कानूनी तौर पर विराजमान होने वाले है। प्रधानमंत्री 5 अगस्त को अयोध्या आएंगे और मान्यता के अनुसार पहले हनुमान मंदिर में पूजा करेंगे उसके बाद राम मंदिर शिलान्यास कर के राममंदिर निर्माण की नींव रखेंगे। भजपा पहले भी 370 और 35A हटा कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुकी है और अब ये अलौकिक निर्णय के बाद सत्तापक्ष स्वभाविक रूप से प्रसंशा के पात्र है। राम नाम एक भावना है ,आस्था है ये निर्णय इतना आसान नही था कितनी सदी बीत गयी,मनोबल भी डगमगाया लेकिन कहते है ना सच थक सकता है परास्त नही हो सकता है।
सदियों से जिस दिन का इंतजार था वो आखिरकार आ गया। राम सबके है इनको समझ पाना इतना सरल नही। राम नाम मात्र सुमिरन करने से आप के अंदर शुद्धता और शांति का संचार होने लगता है। ऐसे ही नही हिंदुओ की आस्था जुड़ी है। श्री राम के लिए जो इतनी भक्ति है वो इसीलिए है क्योंकि जो भी श्रीराम को समझने की मात्र कोशिश करेगा वो भक्ति में स्वयं ही लीन हो जाएगा। श्री हरि ने राम अवतार मनुष्य को उसके धर्म और जीवन जीने की सीख देने के लिए लिया था।उन्होंने हर दुख को सहज स्वीकार कर मनुष्य को जीने का सलीका सिखाया है उन्हें यूँ ही पुरुषों में उत्तम पुरुषोत्तम नही कहा जाता है। भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र को सार्थक कर दिया है। हिन्दू की आस्था की मान रख ली है। इस विवाद को संप्रदायिक रूप देने की कोशिश की गयी सेक्युलरिमस को ठेस पहुँचने का प्रपंच रचा गया । ये स्वर्णिम दिन निर्णय में अड़ंगा डालने वालो के लिए करारा जवाब है। अयोध्या में फिलहाल हरसोउल्लास और उत्सव का माहौल है। भक्ति में सराबोर पुरी अयोध्या नगरी में फिरसे दीवाली मनाने की भव्य तैयारियां शुरू हो गयी है।
ढोलक मंजीरा सब राम नाम मे मगन है। गीतकार अपने गीतों में श्री का नाम भज रहे है। कितना सुंदर पावन दिन है सच मे जितनी प्रसंशा की जाए कम है और ना ही इसका कोई अंत है शब्द कम पड़ जाते है हरीगुणगान के लिए। रामभक्तो में मंदिर शिलान्यास के लिए इतनी उत्सुकता है सोचिये मंदिर बनने के बाद क्या स्थिति होगी। मंदिर निर्माण से अयोध्या की छवि भी सुधर जाएगी। श्रीअयोध्या अभी तक विवाद के लिए सुर्खियों में था लेकीन अब राममंदिर के महिमा के लिए जाना जाएगा। कहा जा रहा है की श्री राम की मूर्ति पूरी दुनिया में सबसे ऊँची होगी। और भव्य मंदिर की संरचना की जाएगी जिसके बेसमेंट में एक म्यूजियम बनाया जाएगा। इस म्यूजियम में भगवान श्री राम के जीवन मे घटित सभी छणों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। वैसे तो मंदिर पक्ष में सभी भक्त को इस पावन क्षण में उपस्थित होने की अनुमति मिलनी चाहिए लेकिन इस जालिम कोरोना के चलते शिलान्यास में सीमित लोग ही जुट पाएंगे ।भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी लाइव वीडियो के जरिये शिलान्यास में शामिल होंगे। लेकिन दुख नही जब मन मे राम हो तो धाम भी समीप लगने लगता है।
ये हुन्दूयों के बरसो के संघर्ष का प्रतिफल है। जो आज उन्हें मिलना ही चाहिये ।
सदियों से जिस दिन का इंतजार था वो आखिरकार आ गया। राम सबके है इनको समझ पाना इतना सरल नही। राम नाम मात्र सुमिरन करने से आप के अंदर शुद्धता और शांति का संचार होने लगता है। ऐसे ही नही हिंदुओ की आस्था जुड़ी है। श्री राम के लिए जो इतनी भक्ति है वो इसीलिए है क्योंकि जो भी श्रीराम को समझने की मात्र कोशिश करेगा वो भक्ति में स्वयं ही लीन हो जाएगा। श्री हरि ने राम अवतार मनुष्य को उसके धर्म और जीवन जीने की सीख देने के लिए लिया था।उन्होंने हर दुख को सहज स्वीकार कर मनुष्य को जीने का सलीका सिखाया है उन्हें यूँ ही पुरुषों में उत्तम पुरुषोत्तम नही कहा जाता है। भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र को सार्थक कर दिया है। हिन्दू की आस्था की मान रख ली है। इस विवाद को संप्रदायिक रूप देने की कोशिश की गयी सेक्युलरिमस को ठेस पहुँचने का प्रपंच रचा गया । ये स्वर्णिम दिन निर्णय में अड़ंगा डालने वालो के लिए करारा जवाब है। अयोध्या में फिलहाल हरसोउल्लास और उत्सव का माहौल है। भक्ति में सराबोर पुरी अयोध्या नगरी में फिरसे दीवाली मनाने की भव्य तैयारियां शुरू हो गयी है।
ढोलक मंजीरा सब राम नाम मे मगन है। गीतकार अपने गीतों में श्री का नाम भज रहे है। कितना सुंदर पावन दिन है सच मे जितनी प्रसंशा की जाए कम है और ना ही इसका कोई अंत है शब्द कम पड़ जाते है हरीगुणगान के लिए। रामभक्तो में मंदिर शिलान्यास के लिए इतनी उत्सुकता है सोचिये मंदिर बनने के बाद क्या स्थिति होगी। मंदिर निर्माण से अयोध्या की छवि भी सुधर जाएगी। श्रीअयोध्या अभी तक विवाद के लिए सुर्खियों में था लेकीन अब राममंदिर के महिमा के लिए जाना जाएगा। कहा जा रहा है की श्री राम की मूर्ति पूरी दुनिया में सबसे ऊँची होगी। और भव्य मंदिर की संरचना की जाएगी जिसके बेसमेंट में एक म्यूजियम बनाया जाएगा। इस म्यूजियम में भगवान श्री राम के जीवन मे घटित सभी छणों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। वैसे तो मंदिर पक्ष में सभी भक्त को इस पावन क्षण में उपस्थित होने की अनुमति मिलनी चाहिए लेकिन इस जालिम कोरोना के चलते शिलान्यास में सीमित लोग ही जुट पाएंगे ।भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी लाइव वीडियो के जरिये शिलान्यास में शामिल होंगे। लेकिन दुख नही जब मन मे राम हो तो धाम भी समीप लगने लगता है।
ये हुन्दूयों के बरसो के संघर्ष का प्रतिफल है। जो आज उन्हें मिलना ही चाहिये ।
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